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पहली बार काशी आ रहे हैं? विश्वनाथ दर्शन से घाट तक की पूरी तैयारी एक नज़र में

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

हर साल लाखों श्रद्धालु एक ही कामना लेकर बनारस पहुँचते हैं — बाबा विश्वनाथ के शांत दर्शन। लेकिन पहली बार आने वाले कई यात्री स्टेशन, ठहरने की जगह और मंदिर तक के रास्ते की उलझन में घंटों गँवा देते हैं। यूट्यूब चैनल 'रवि ऑन ट्रिप' की एक नई यात्रा गाइड इन दिनों दर्शकों को कदम-दर-कदम योजना बनाने में मदद कर रही है, और उसकी व्यावहारिक बातें हर तीर्थयात्री के काम की हैं। सबसे पहली बात है पहुँचने की। वाराणसी में तीन रेलवे स्टेशन हैं और तीनों से मंदिर पहुँचा जा सकता है। वाराणसी जंक्शन (BSB), जिसे लोग कैंट कहते हैं, मंदिर से करीब पाँच-छह किलोमीटर दूर है। काशी स्टेशन (KEI) लगभग तीन किलोमीटर पर है, और वाराणसी सिटी (BCY) तब काम आता है जब कैंट की टिकट न मिले। तीनों विकल्प देखने से यात्रा रद्द होने से बच सकती है। ठहरने के लिए विश्वनाथ कॉरिडोर के पीछे की गलियों में हर बजट के विकल्प हैं — तीन-चार सौ रुपये की डॉर्मिटरी से लेकर गेस्ट हाउस और विशालाक्षी मंदिर के पास गंगा के मनोरम दृश्य वाले छत के होटल तक। साधारण यात्री, परिवार और आराम चाहने वाले, सभी को गर्भगृह से एक किलोमीटर के दायरे में ठिकाना मिल जाता है। दर्शन का अपना पारंपरिक क्रम है। मंदिर की गली में पहले ढुंढिराज गणपति के दर्शन होते हैं, फिर बाबा विश्वनाथ के, और उसके बाद माँ अन्नपूर्णा के मठ में, जहाँ हर दिन निःशुल्क अन्न-प्रसाद मिलता है। अन्नपूर्णा गली से थोड़ी दूर पर विशालाक्षी शक्तिपीठ है, जहाँ मान्यता के अनुसार माता सती के कर्ण कुंडल गिरे थे। काशी के कोतवाल काल भैरव के दर्शन से यह परिक्रमा पूरी होती है। दिन का समापन सूर्योदय की नौका यात्रा, दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती और बनारसी चाट की एक प्लेट के साथ कीजिए। थोड़ी सी योजना से काशी के दो-तीन दिन बिना भागदौड़ के, कम खर्च में और मन को तृप्त करने वाले बन सकते हैं।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: