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काशी के खिचड़ी बाबा: हर सुबह 1000 किलो खिचड़ी का प्रसाद, हज़ारों का पेट भरता भंडारा

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

वाराणसी अपने घाटों और मंदिरों के लिए विश्वभर में जाना जाता है, लेकिन इस शहर की असली आत्मा अक्सर उन जगहों पर दिखती है जहाँ भीड़ नहीं, सेवा होती है। ऐसा ही एक स्थान है "खिचड़ी बाबा" के नाम से मशहूर दैनिक भंडारा, जहाँ हर सुबह लगभग 1000 किलो खिचड़ी का प्रसाद बनता है और हर आने वाले को निःशुल्क परोसा जाता है। श्रद्धालु, तीर्थयात्री, मज़दूर, छात्र और यात्री, सब एक ही पंगत में बैठकर भोजन करते हैं। इस भंडारे का पैमाना देखकर कोई भी दंग रह जाए। तैयारी भोर से पहले शुरू हो जाती है। लकड़ी की आँच पर विशाल कड़ाहों में चावल, दाल, सब्ज़ियाँ और मसाले पकते हैं। सुबह सात बजे से वितरण शुरू होता है और लगभग ग्यारह बजे तक चलता है। इन चार से पाँच घंटों में करीब पाँच हज़ार लोग प्रसाद ग्रहण कर लेते हैं। पूरा काम स्वयंसेवकों और समाज के सहयोग से चलता है। काशी में खिचड़ी का विशेष महत्व है। इसे सात्विक और सुपाच्य माना जाता है, और परंपरा के अनुसार पहले भगवान को भोग लगाकर फिर प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है। जिस शहर में सेवा जीवन का हिस्सा है, वहाँ यह भंडारा उस पुरानी बनारसी मान्यता को जीवित रखता है कि किसी अजनबी को भोजन कराना घाट पर किए किसी भी अनुष्ठान जितना ही पुण्य है। यदि आप बनारस आएँ तो इस भंडारे को ज़रूर देखें। सुबह जल्दी पहुँचें, सबके साथ पंगत में बैठें और दोनों हाथों से प्रसाद लें। यह अनुभव सरल है, पर कई यात्री इसे किसी भी स्मारक से अधिक यादगार बताते हैं। संभव हो तो समय या सामग्री देकर सहयोग करें, क्योंकि ये सामुदायिक रसोइयाँ पूरी तरह सद्भावना पर चलती हैं।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: