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लोलार्क छठ 2026: काशी के प्राचीन सूर्य तीर्थ पर आस्था का महासंगम

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

भाद्रपद मास में काशी के तुलसी घाट के पास एक शांत सा कोना अचानक श्रद्धा के सागर में बदल जाता है। लोलार्क कुंड, जिसे काशी के सबसे प्राचीन तीर्थों में गिना जाता है, लोलार्क छठ यानी लोलार्क षष्ठी के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं से भर उठता है। इस वर्ष यह पर्व इसी सप्ताह है और अस्सी से तुलसी घाट तक की गलियों में तैयारियां जोरों पर हैं। लोलार्क कुंड काशी के प्रमुख सूर्य तीर्थों में से एक है। "लोलार्क" शब्द का अर्थ है कांपता हुआ सूर्य, और मान्यता है कि यहां सूर्य की किरणें विशेष प्रभाव के साथ पड़ती थीं। यहां लोलार्क आदित्य की पूजा होती है और षष्ठी के दिन कुंड में स्नान अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। संतान की कामना लेकर अनेक दंपति यहां आते हैं, तो जिनकी मनोकामना पूरी हो चुकी होती है, वे परिवार सहित आभार प्रकट करने लौटते हैं। यहां की परंपराएं अनोखी हैं। दंपति हाथ पकड़कर कुंड की गहरी सीढ़ियां उतरते हैं, साथ में डुबकी लगाते हैं और पुराने वस्त्र वहीं छोड़ देते हैं, जिसे बीते कल को त्यागने का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु कोई एक फल या सब्जी कुंड में अर्पित करते हैं और जीवन भर उसे न खाने का संकल्प लेते हैं। कतारें अक्सर एक रात पहले से ही लग जाती हैं और बिहार, पूर्वांचल तथा दूर-दराज से आए भक्त भदैनी की गलियों में डेरा डाल लेते हैं। पर्यटकों के लिए लोलार्क छठ काशी की जीवंत लोक परंपरा को करीब से देखने का दुर्लभ अवसर है, जो गंगा आरती और बाबा विश्वनाथ दर्शन के साथ-साथ इस नगरी की पहचान है। पास के तुलसी घाट अखाड़े का माहौल इस उत्सव में और रंग भर देता है। यदि आप इस सप्ताह बनारस में हैं, तो सुबह-सुबह अस्सी घाट से लोलार्क कुंड तक की पैदल यात्रा अवश्य करें।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार:

Lolark Chhath 2026: Why Thousands Gather at Varanasi's | HelloBanaras