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17 सितंबर को लोलार्क छठ: दुर्लभ ग्रह-योग के बीच काशी के सूर्य-कुंड पर उमड़ेगी आस्था

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

काशी के सबसे प्राचीन और अनोखे पर्वों में से एक, लोलार्क छठ, इस वर्ष गुरुवार, 17 सितंबर को मनाया जाएगा। यह पर्व अस्सी के पास भदैनी स्थित लोलार्क कुंड पर होता है — सूर्यदेव (लोलार्क) की उपासना से जुड़ा एक गहरा, सीढ़ीदार कुंड। यहां दंपती संतान-सुख की कामना लेकर स्नान करने आते हैं। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु स्नान के वस्त्र वहीं छोड़ देते हैं और कुंड पर फल अर्पित करते हैं। इस बार की तिथि को ज्योतिषी विशेष फलदायी बता रहे हैं। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार ज्योतिषी कृष्ण शास्त्री का कहना है कि इस दिन सिद्धि योग, राजयोग और पांच महापुरुष योग एक साथ बन रहे हैं — ऐसा संयोग सात वर्ष बाद आ रहा है। रिपोर्ट में स्नान का श्रेष्ठ समय सुबह 6:31 से 10:26 बजे तक बताया गया है; इससे पहले ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 3:55 से) और विजय मुहूर्त रहेगा। उत्तर प्रदेश के साथ बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, इसलिए भदैनी और अस्सी की गलियों में भोर से ही भीड़ रहेगी। दर्शन के लिए जाएं तो जल्दी निकलें, सामान कम रखें और घाटों के आसपास की यातायात व्यवस्था पर नज़र रखें। बहुत से परिवारों के लिए यह गहरी आस्था की सुबह है — और आगंतुकों के लिए काशी की एक आत्मीय, जीवंत परंपरा को करीब से देखने का दुर्लभ अवसर।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: Amar Ujala