नमो घाट फिर लौटा अपने रंग में: गंगा का जलस्तर घटा, सैलानियों के लिए खुली राह
कई हफ्तों तक मानसूनी गंगा की लहरें नमो घाट की ऊपरी सीढ़ियों को छूती रहीं, लेकिन अब वाराणसी का यह भव्य घाट फिर अपने पूरे स्वरूप में दिखाई देने लगा है। सितंबर के मध्य तक गंगा का जलस्तर लगातार घटता गया है और घाट का चौड़ा परिसर, प्रसिद्ध नमस्ते मुद्रा वाली प्रतिमाएं और निचले प्लेटफॉर्म एक बार फिर आम लोगों के लिए खुल गए हैं। इस मौसम में बनारस आने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह शहर के सबसे नए और सबसे विशाल घाट को फिर से देखने का अच्छा अवसर है। राजघाट के पास पुराने खिड़किया घाट की जगह बना नमो घाट, नीचे की ओर बसे संकरे ऐतिहासिक घाटों से बिल्कुल अलग है। इसका खुला विशाल प्रांगण, फूड कोर्ट, जेट्टी और दर्शक दीर्घाएं बड़ी भीड़ को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। यही कारण है कि यह परिवारों, शाम की सैर करने वालों और फोटोग्राफरों की पसंदीदा जगह बन चुका है। पानी उतरने के साथ सफाई कर्मी बाढ़ से आई गाद और कचरा हटाने में जुटे हैं और घाट फिर अपनी साफ-सुथरी पहचान में लौट रहा है। आगंतुकों के लिए एक जरूरी सलाह: नमो घाट प्री-वेडिंग और पोर्ट्रेट शूट के लिए बेहद लोकप्रिय है, और इसके लिए अनुमति की व्यवस्था लागू है। पेशेवर उपकरणों के साथ आने वाले जोड़े और फोटोग्राफर शूट शुरू करने से पहले घाट के सहायता केंद्र पर मौजूदा नियम और शुल्क की जानकारी अवश्य ले लें। निजी उपयोग के लिए सामान्य फोटोग्राफी पहले की तरह निःशुल्क है। स्थानीय लोग आगे की तैयारियों को लेकर भी उत्साहित हैं। नमो घाट का खुला विस्तार पहले भी एयर शो और बड़े सार्वजनिक आयोजनों का साक्षी रहा है, और मानसून के बाद गंगा के पूरी तरह शांत होने पर ऐसे और आयोजनों की चर्चा है। सुबह की सैर हो, जेट्टी से शाम की नौका यात्रा हो या बस गंगा को अपने तटों पर लौटते देखना हो, नमो घाट आपके स्वागत के लिए फिर तैयार है।
हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: