नमो घाट: काशी का नया किनारा, जहाँ शाम की गंगा आरती के साथ मिलती है आधुनिकता
वाराणसी के प्राचीन घाटों की श्रृंखला में नमो घाट एक नई कड़ी है। राजघाट के पास पुराने खिड़किया घाट की जगह पर बना यह घाट काशी का सबसे नया और सबसे बड़े घाटों में से एक है, और बहुत कम समय में यह परिवारों, पर्यटकों और श्रद्धालुओं की शाम की पसंदीदा जगह बन गया है। यहाँ आने वालों का ध्यान सबसे पहले गंगा किनारे खड़ी नमस्कार मुद्रा वाली विशाल हथेलियों की मूर्तियाँ खींचती हैं। यह आधुनिक प्रतीक आज काशी की सबसे ज़्यादा तस्वीरों में दिखने वाली जगहों में शामिल है। इसके चारों ओर खुले चौड़े रास्ते, हरे-भरे लॉन, खाने-पीने के स्टॉल, साइकिल ट्रैक और बैठने की साफ-सुथरी व्यवस्था है, ताकि हर उम्र के लोग आराम से नदी किनारे समय बिता सकें। घाट पर तैरता हुआ जेटी और हेलीपैड भी है, और यहीं से क्रूज़ और नाव की सवारी शुरू होती है। सूरज ढलते ही नमो घाट का रूप बदल जाता है। यहाँ की संध्या गंगा आरती दीपों, शंखनाद और भजनों के साथ होती है। दशाश्वमेध घाट की भव्य आरती की तुलना में यह शांत है, और यही इसकी खूबी है। लोग सीढ़ियों पर बैठकर बिना भीड़ के आरती देख सकते हैं, भजन सुन सकते हैं और गंगा की लहरों पर झिलमिलाती रोशनी का आनंद ले सकते हैं। अगर आप वाराणसी घूमने की योजना बना रहे हैं, तो नमो घाट को अपनी सूची में ज़रूर जोड़ें। यहाँ सड़क से आसानी से पहुँचा जा सकता है, पास में पार्किंग है, और शाम की नाव यात्रा या नए बने रिवरफ्रंट पर टहलने के साथ यह अनुभव और भी सुंदर हो जाता है। सूर्यास्त से एक घंटा पहले पहुँचें, आरती तक रुकें और स्टॉल की बनारसी चाट के साथ शाम पूरी करें। यह काशी की सनातन भक्ति है, एक नए और स्वागत भरे रूप में।
हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: