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पट्टचित्र, पाइका का ढोल और कोरापुट की कॉफ़ी: हस्तकला संकुल में तीन दिन का 'ओडिशा परब'

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

तीन दिन से दीनदयाल हस्तकला संकुल का एक दूसरा पता भी है। ओडिशा की कला, नृत्य और रसोई को साथ लेकर आया 'ओडिशा परब' 22 से 24 अगस्त तक संकुल में चल रहा है। आयोजन उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की ओर से किया गया है। सबसे ज़्यादा देर लोग शिल्प वाले हिस्से में रुकते हैं। सामने बैठे पट्टचित्र कलाकार आँखों के आगे चित्र बनाते हैं; पास ही ताड़पत्र पर नक्काशी, ढोकरा की ढलाई, चांदी की महीन तारकशी और कोटपैड वस्त्र लिए हथकरघा बुनकर हैं। पीतल-कांसा और जूट के उत्पाद भी कतार में हैं — ये वे परंपराएँ हैं जिन्हें बनारस का बुनकर एक नज़र में पहचान लेता है, क्योंकि करघे का व्याकरण एक नदी से दूसरी नदी तक बहुत नहीं बदलता। शामें मंच के नाम रहीं। ओडिसी और गोटीपुआ, संबलपुरी गीत-नृत्य, जनजातीय अंचल के घुमरा और ढेमसा, और पाइका अखाड़ा की रणभेरी — सबकी बारी आई। बाक़ी बात खानपान के दस स्टॉल पूरी करते हैं: पीठा, आलूदम, बाजरा से बने व्यंजन, छेना पोड़ा और कोरापुट की ऑर्गेनिक कॉफ़ी। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इसे दोनों राज्यों के बीच पर्यटन सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत बताया, जिसमें आगे चलकर वाराणसी–पुरी और अयोध्या–कोणार्क जैसे साझा सर्किट की परिकल्पना है। काशी के लिए यह एक और सप्ताहांत है, जब पड़ोसी राज्य की शिल्प-अर्थव्यवस्था शहर में आकर बैठी और सहज ही देखने लायक बन गई।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: Amar Ujala — Varanasi · Amar Ujala — Odisha Parab · Live Aaryaavart · Saahas Samachar

Pattachitra, Paika drums and Koraput coffee: 'Odisha Parab' | HelloBanaras