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पहली बार काशी आ रहे हैं? सुबह की नौका सैर से गंगा आरती तक, बनारस घूमने की पूरी तैयारी

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

वाराणसी को दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में गिना जाता है, और पहली बार आने वाला हर यात्री जल्द ही समझ जाता है कि ऐसा क्यों कहा जाता है। बनारस पर बनी एक नई यात्रा श्रृंखला का पहला भाग इस शहर को इमारतों की सूची की तरह नहीं, बल्कि एक ऐसे अनुभव की तरह पेश करता है जो सुबह और शाम में अलग-अलग रंग दिखाता है। यही नज़रिया यात्रा की योजना बनाने वालों के लिए सबसे अच्छी सलाह है। दिन की शुरुआत सूर्योदय से पहले करें। घाटों पर पहली किरण पड़ते समय गंगा में नौका विहार काशी से परिचय का सबसे सुंदर तरीका है। इससे नदी के किनारे फैले पत्थर की सीढ़ियों, महलों और मंदिरों की लंबी कतार को शांति से निहारा जा सकता है। इसके बाद पुरानी गलियों से होते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर बढ़ें, रास्ते में कुल्हड़ वाली चाय पिएँ और गलियों में खो जाने का आनंद लें। मणिकर्णिका घाट, शहर का प्राचीन श्मशान घाट, वह स्थान है जहाँ यात्री शांत श्रद्धा के साथ पहुँचते हैं; जीवन और मृत्यु के प्रति काशी का खुला और सहज भाव यहीं समझ में आता है। शाम होते ही दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती के साथ माहौल पूरी तरह बदल जाता है, जहाँ दीपों, शंखनाद और मंत्रों के बीच हज़ारों लोग किनारे पर जुटते हैं। दिन का समापन बनारसी पान, चाट की एक प्लेट या रेशमी साड़ियों की दुकानों की सैर से करें। वाराणसी पहुँचना आसान है। रेल मार्ग से यह शहर देश के हर बड़े केंद्र से जुड़ा है, लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीधी उड़ानें उतरती हैं, और राजमार्ग इसे पड़ोसी राज्यों से जोड़ते हैं। शहर के भीतर ई-रिक्शा और ऑटो सुविधाजनक हैं, लेकिन घाटों और पुराने मोहल्लों के लिए पैदल चलना ही असली बनारस से मिलने का तरीका है।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: