तीन दिन बनारस में: घाट, मंदिर, सारनाथ और बनारसी स्वाद की पूरी यात्रा योजना
वाराणसी, जिसे यहाँ के लोग काशी और बनारस कहते हैं, दुनिया के सबसे प्राचीन जीवंत शहरों में गिना जाता है। पहली बार आने वाले यात्री के लिए इतने घाट, मंदिर और गलियाँ थोड़ी उलझन पैदा कर सकती हैं, लेकिन तीन दिन की एक सुनियोजित यात्रा से आप बिना भागदौड़ के इस नगरी की आत्मा को महसूस कर सकते हैं। पहले दिन की शुरुआत पंचगंगा घाट पर स्नान से करें, फिर काशी विश्वनाथ मंदिर और नगर के कोतवाल माने जाने वाले काल भैरव मंदिर के दर्शन करें। वहाँ से महामृत्युंजय मंदिर और झुके हुए रत्नेश्वर महादेव मंदिर होते हुए मणिकर्णिका घाट पहुँचें। शाम ढलते ही दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती का अनुभव लें और उसके बाद गलियों में कचौड़ी-सब्जी, टमाटर चाट और ठंडाई का स्वाद ज़रूर चखें। दूसरा दिन नदी के दक्षिणी किनारे के नाम रहे। अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस की प्रातः आरती देखें और फिर सूर्योदय के समय नौका विहार करें, जहाँ से अर्धचंद्राकार घाटों का अद्भुत नज़ारा दिखता है। नदी के उस पार रेत पर ऊँट की सवारी का आनंद लिया जा सकता है। दोपहर में संकट मोचन हनुमान मंदिर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में स्थित नया विश्वनाथ मंदिर और अखंड भारत के मानचित्र वाला अनोखा भारत माता मंदिर देखें। तीसरे दिन गंगा पार कर काशी नरेश के रामनगर किले पहुँचें और फिर सारनाथ चलें, जहाँ भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप, थाई और जापानी मंदिर तथा दिगंबर जैन मंदिर सभी पास-पास हैं। अशोक की सिंह मुद्रा वाले सारनाथ संग्रहालय के लिए कम से कम एक घंटा ज़रूर रखें। तीन दिन में बनारस कभी पूरा नहीं घूमा जा सकता, लेकिन यह मार्ग इसके घाटों, आराध्य देवताओं, बौद्ध विरासत और स्वादिष्ट रसोई को छूता है और हर यात्री को दोबारा लौटने का एक बहाना दे जाता है।
हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: