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काशी में दुर्गा पूजा की धूम: रोशनी में नहाए पंडालों की अनूठी छटा

नवरात्रि के दीपों से जगमगाती काशी इन दिनों एक अलग ही रंग में नजर आती है।

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

इस वर्ष वाराणसी में दुर्गा पूजा की रौनक ऐसी है कि सप्तमी की रात श्रद्धालु और पर्यटक बड़ी संख्या में शहर के पंडालों में माँ दुर्गा के दर्शन के लिए निकल पड़े।

हर मोहल्ले का पंडाल अपनी कला और कल्पना की कहानी कहता है। कारीगरों ने भव्य थीम, बारीक रोशनी और सुंदर प्रतिमाओं से पंडालों को सजाया है। कई समितियों ने इस बार पर्यावरण के अनुकूल सामग्री और नए-नए डिज़ाइनों पर ज़ोर दिया है। एक पंडाल से दूसरे पंडाल तक जाते हुए लोग सजावट निहारते हैं और फिर श्रद्धा से हाथ जोड़ लेते हैं।

वाराणसी में दुर्गा पूजा की जड़ें बहुत गहरी हैं। यहाँ बंगाली परंपराएँ पीढ़ियों से काशी की अपनी भक्ति-संस्कृति के साथ घुल-मिलकर चलती आई हैं। ढाक की थाप, धूप की सुगंध और मंत्रों की गूँज जब बाबा विश्वनाथ की नगरी के वातावरण में मिलती है, तो पूरा शहर उत्सव में डूब जाता है। यहाँ शाम का समय पूजा के साथ-साथ मेल-मिलाप और सामुदायिक भावना का भी होता है।

नई सड़क और अर्दली बाज़ार जैसे इलाकों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं। यदि आप नवरात्रि में बनारस आने की योजना बना रहे हैं, तो काशी का यह उत्सवी रूप देखना यादगार रहेगा। बस हल्का सामान रखें, शाम को जल्दी निकलें और भीड़ के दौरान स्थानीय निर्देशों का पालन करें।

आस्था हो, शिल्प हो या उत्सव का माहौल, बनारस में पंडाल-भ्रमण की एक शाम इस जीवंत संस्कृति को करीब से महसूस करने का सुंदर अवसर है।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: