गंजारी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम: शिव-भाव से रचा काशी का नया गौरव
काशी में आस्था हमेशा से आकार गढ़ती आई है, और अब यही परंपरा खेल के मैदान तक पहुँच गई है। राजातालाब के पास गंजारी में बन रहा वाराणसी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम देश के सबसे चर्चित क्रिकेट मैदानों में गिना जाने लगा है। इसकी चर्चा केवल यहाँ होने वाले मैचों के लिए नहीं, बल्कि इसके अनूठे स्वरूप के कारण हो रही है। स्टेडियम की पूरी संरचना भगवान शिव और काशी के घाटों से प्रेरित है। फ्लडलाइट के ऊँचे खंभे त्रिशूल के आकार में खड़े हैं, विशाल छत महादेव के मस्तक पर सजे अर्धचंद्र की याद दिलाती है और भवन के कुछ हिस्सों में डमरू की झलक मिलती है। दर्शक दीर्घाएँ सीढ़ीनुमा बनाई गई हैं, जो गंगा किनारे के घाटों जैसी लगती हैं, और बाहरी दीवारों पर बेलपत्र की आकृतियाँ उकेरी गई हैं। पहली गेंद फेंके जाने से पहले ही यह मैदान पूरी तरह बनारसी महसूस होता है। दिखावट के साथ-साथ यह एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय स्थल के रूप में तैयार किया जा रहा है। लगभग तीस हज़ार दर्शकों की क्षमता, आधुनिक अभ्यास सुविधाएँ और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए उपयुक्त व्यवस्थाएँ इसे पूर्वांचल का प्रमुख खेल केंद्र बनाएँगी। जिस शहर ने हमेशा क्रिकेट प्रेमी दिए लेकिन बड़ा मैदान नहीं पाया, उसके लिए यह लंबे इंतज़ार के बाद मिला उपहार है। स्थानीय लोग और यात्रा व्लॉगर अभी से इसे तस्वीरों का ठिकाना बना चुके हैं। आसमान में उठते त्रिशूल और घाटनुमा सीढ़ियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं। जब यह मैदान पूरी तरह खुल जाएगा, तो यहाँ का हर मैच काशी की आध्यात्मिक पहचान में लिपटे क्रिकेट के रोमांच का अनुभव देगा। अपनी शाश्वत विरासत को नए रूपों में सँजोने वाले इस शहर के लिए यह एक और सुंदर अध्याय है।
हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: