दिन विशेषवाराणसी
वाराणसी — सोमवार, 13 सितंबर 2027
उस दिन के आरती और आयोजनों के समय, पंचांग और शहर के पर्व।
पर्व: प्रदोष (शुक्ल)
दिन का पंचांग
सोम, 13 सितंबर का पंचांग
वाराणसी के समय, भारतीय समय में
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
पंचांग
- तिथि
- त्रयोदशी आरंभ समाप्त चतुर्दशी समाप्त
- नक्षत्र
- श्रवण आरंभ समाप्त धनिष्ठा समाप्त सूर्योदय पर चरण 4
- योग
- अतिगंड आरंभ समाप्त सुकर्म समाप्त
- करण
- कौलव आरंभ समाप्त तैतिल समाप्त गर समाप्त
- वार
- सोमवार
- पक्ष
- शुक्ल
मास और संवत
- मास (पूर्णिमांत)
- भाद्रपद
- मास (अमांत)
- भाद्रपद
- विक्रम संवत
- 2084 रौद्री
- शक संवत
- 1949 प्लवंग
- ऋतु
- शरद
- अयन
- दक्षिणायन
सूर्य और चंद्र राशि
- सूर्य राशि
- सिंह
- चंद्र राशि
- मकर आरंभ समाप्त कुंभ
- सूर्य नक्षत्र
- पूर्वा फाल्गुनी
- दिनमान / रात्रिमान
- 12 घं 22 मि / 11 घं 39 मि
शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त
- 46मि
- प्रातः सन्ध्या
- 1घं 10मि
- अभिजित मुहूर्त
- 49मि
- विजय मुहूर्त
- 49मि
- गोधूलि मुहूर्त
- 23मि
- सायाह्न सन्ध्या
- 1घं 10मि
- अमृत काल
- 1घं 48मि
- निशिता मुहूर्त
- 47मि
अशुभ समय
- राहु काल
- 1घं 33मि
- यमगण्ड
- 1घं 33मि
- वर्ज्य
- 1घं 48मि
- दुर्मुहूर्त
- 49मि
- गुलिक काल
- 1घं 33मि
- दुर्मुहूर्त
- 49मि
- दिशा शूल
- पूर्व दिशा की यात्रा से बचें
चौघड़िया, दिन और रात
दिन
- अमृतउत्तम
- कालबचें
- रोगबचें
- शुभउत्तम
- उद्वेगबचें
- चलसामान्य
- लाभउत्तम
- अमृतउत्तम
रात
- चलसामान्य
- रोगबचें
- कालबचें
- लाभउत्तम
- उद्वेगबचें
- शुभउत्तम
- अमृतउत्तम
- चलसामान्य
चन्द्रबलम और ताराबलम
इन चन्द्र राशियों और नक्षत्रों में जन्मे लोगों के लिए चन्द्रमा की स्थिति अनुकूल है।
शुभ चन्द्रबलम 7:33 अपराह्न तक
मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन
अष्टम चन्द्र: मिथुन राशि (मृगशिरा (चरण 3–4), आर्द्रा, पुनर्वसु (चरण 1–3)) में जन्मे लोगों के लिए
शुभ चन्द्रबलम अगले सूर्योदय तक
मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुंभ
अष्टम चन्द्र: कर्क राशि (पुनर्वसु (चरण 4), पुष्य, आश्लेषा) में जन्मे लोगों के लिए
शुभ ताराबलम 6:04 पूर्वाह्न तक
अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद
शुभ ताराबलम अगले सूर्योदय तक
भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, रेवती
पंचक रहित मुहूर्त और उदय लग्न
पंचक रहित मुहूर्त
- चोर पंचक
- शुभ मुहूर्त
- रोग पंचक
- शुभ मुहूर्त
- मृत्यु पंचक
- अग्नि पंचक
- शुभ मुहूर्त
- राज पंचक
- शुभ मुहूर्त
- शुभ मुहूर्त
- राज पंचक
- शुभ मुहूर्त
- चोर पंचक
- शुभ मुहूर्त
- रोग पंचक
उदय लग्न
- सिंह
- कन्या
- तुला
- वृश्चिक
- धनु
- मकर
- कुंभ
- मीन
- मेष
- वृषभ
- मिथुन
- कर्क
गौरी पंचांगम, दिन और रात
दिन
- अमृतम्सर्वोत्तम
- विषम्अशुभ
- रोगम्अमंगल
- लाभम्उन्नति
- धनम्सम्पत्ति
- सुगम्उत्तम
- सोरम्अशुभ
- उथीउत्तम
रात
- सुगम्उत्तम
- सोरम्अशुभ
- उथीउत्तम
- अमृतम्सर्वोत्तम
- विषम्अशुभ
- रोगम्अमंगल
- लाभम्उन्नति
- धनम्सम्पत्ति
होरा, दिन और रात
दिन
- चन्द्रनम्र
- शनिमन्द
- गुरुफलदायी
- मंगलउग्र
- सूर्यबलवान
- शुक्रलाभदायी
- बुधतीव्र
- चन्द्रनम्र
- शनिमन्द
- गुरुफलदायी
- मंगलउग्र
- सूर्यबलवान
रात
- शुक्रलाभदायी
- बुधतीव्र
- चन्द्रनम्र
- शनिमन्द
- गुरुफलदायी
- मंगलउग्र
- सूर्यबलवान
- शुक्रलाभदायी
- बुधतीव्र
- चन्द्रनम्र
- शनिमन्द
- गुरुफलदायी
आरती और आयोजन
इस दिन की समय-सारिणी
- →
मंगला आरती
काशी विश्वनाथ मंदिर
तड़के की आरती; गर्भगृह दर्शन हेतु सामान्यतः टिकट आवश्यक। पर्व और ग्रहण के दिन प्रवेश नियम बदल सकते हैं।
मंगला आरती
अन्नपूर्णा देवी मंदिर
मंगला आरती के साथ मंदिर खुलता है; प्रातः दर्शन लगभग 11:30 बजे तक, फिर भोग हेतु गर्भगृह बंद। श्रावण में भोर से ही गली में कतार लगती है।
- →
प्रातः दर्शन प्रारंभ
नया विश्वनाथ मंदिर (बीएचयू)
खुला 04:00-12:00 व 13:00-21:00 (दोपहर में बंद)। बीएचयू परिसर में काशी विश्वनाथ की श्वेत संगमरमर प्रतिकृति; सभी धर्मों के लिए खुला, भीड़ बहुत कम।
मंगला आरती
श्री सेनापति बनकटी हनुमान मंदिर
प्रातः दर्शन प्रारंभ
काल भैरव मंदिर
काशी के कोतवाल — मान्यता है कि विश्वनाथ से पहले इनके दर्शन करें। दोपहर लगभग 1:30-4:30 पट बंद; रविवार-मंगलवार लंबी कतार, जल्दी पहुंचें।
प्रातः दर्शन प्रारंभ
दुर्गाकुंड मंदिर
भोर से देवी दर्शन; स्रोतों में खुलने का समय 04:00–05:30 बताया गया है। दोपहर लगभग 12–3 बजे कपाट बंद। मंगलवार, शुक्रवार व नवरात्र में सर्वाधिक भीड़।
प्रातः दर्शन प्रारंभ
संकट मोचन हनुमान मंदिर
पट लगभग 5 बजे खुलते हैं (कुछ स्रोत 4:30 बताते हैं)। मोबाइल, कैमरा, बैग वर्जित — गेट पर लॉकर। बेसन के लड्डू का प्रसाद अंदर काउंटर से खरीदें; बंदरों से सावधान।
- →
सुबह-ए-बनारस
अस्सी घाट
भोर का कार्यक्रम: आरती, वैदिक मंत्र-हवन, फिर शास्त्रीय राग और ~40 मिनट का निःशुल्क योग सत्र। नव-फर में ~05:30 से; अग-सित में सीढ़ियाँ जलमग्न हो सकती हैं।
- →
प्रातः आरती
दशाश्वमेध घाट
संध्या गंगा आरती से कम भीड़; नदी की स्थिति सामान्य हो तो फ़ोटो के लिए अच्छा।
प्रातः आरती
तुलसी मानस मंदिर
रामचरितमानस मंदिर में आरती, जिसकी संगमरमर दीवारों पर तुलसीदास की चौपाइयाँ अंकित हैं। खुला 05:30-12:00 व 15:30-21:00; शांत, परिवार-अनुकूल।
- →
सारनाथ संग्रहालय खुलता है
पुरातत्व संग्रहालय, सारनाथ
एएसआई संग्रहालय, मूल अशोक सिंह-स्तंभ यहीं है। शुक्रवार बंद। बगल के धमेक स्तूप के साथ देखें; पुराने शहर से सारनाथ 10 किमी।
- →
अन्नक्षेत्र निःशुल्क भोजन (प्रसाद)
काशी अन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र, विश्वनाथ गली
ट्रस्ट के दोनों भवनों (कालिका गली, बांसफाटक) में सबके लिए निःशुल्क असीमित शाकाहारी थाली; प्रतिदिन ~20,000 भोजन। सेवा प्रायः 10:00-16:00; 14:30 तक पहुँचें।
- →
भोग आरती
काशी विश्वनाथ मंदिर
मध्याह्न भोग; सुरक्षा कतार और अस्थायी बंदी को ध्यान में रखकर जाएँ।
अपराह्न दर्शन पुनः आरंभ
संकट मोचन हनुमान मंदिर
मंदिर लगभग 11:30 से 3 बजे तक बंद रहता है; दर्शन 3 बजे से रात ~11 बजे तक (मंगल-शनि को मध्यरात्रि तक)। मोबाइल-कैमरा गेट के लॉकर में रखें।
संध्या आरती
तुलसी मानस मंदिर
राम मंदिर की दूसरी दैनिक आरती; दोपहर विश्राम के बाद 15:30 बजे कपाट पुनः खुलते हैं। संगमरमर की दीवारों पर रामचरितमानस अंकित।
- →
गंगा आरती (विश्वनाथ धाम)
ललिता घाट
मार्च 2026 से मंदिर न्यास की गंगा द्वार आरती; पहले 18:00, अब 18:30। बाढ़ में आरती धाम के ऊपरी चबूतरे (सेल्फी पॉइंट) से होती है। नई व्यवस्था - समय स्थानीय स्तर पर जांचें।
संध्या बौद्ध सुत्त-पाठ
मूलगंध कुटी विहार, सारनाथ
भिक्षुओं के साथ बुद्ध पूजा, धम्मचक्क सुत्त-पाठ और ध्यान; निःशुल्क, सभी का स्वागत। सारनाथ घाटों से 10 किमी (~30-40 मिनट) - वापसी की सवारी पहले तय करें।
- →
संध्या गंगा आरती
दशाश्वमेध घाट
गंगा सेवा निधि की आरती; बगल के राजेंद्र प्रसाद घाट पर समानांतर आरती। अक्टूबर-मार्च में ~17:45 से। बाढ़ में आरती घाट के ऊपर की छतों से होती है।
- →
संध्या आरती
अस्सी घाट
दशाश्वमेध की भव्य आरती से छोटी और शांत; सूर्यास्त पर निर्भर — सर्दियों (नव-फर) में ~18:00 बजे। बाढ़ (अग-सित) में ऊपरी सीढ़ियों से होती है।
गौर आरती और कीर्तन
इस्कॉन वाराणसी, दुर्गाकुंड रोड
दुर्गाकुंड के पास छोटे राधा गोपाल बिहारी मंदिर में जीवंत हरे कृष्ण कीर्तन। आगंतुकों का स्वागत; समय मानक इस्कॉन परंपरा अनुसार — स्थानीय पुष्टि कर लें।
- →
सप्तर्षि आरती
काशी विश्वनाथ मंदिर
संध्या की आरती का आधिकारिक नाम — सात अर्चक सप्तर्षि परंपरा में आरती करते हैं। बैठने हेतु टिकट shrikashivishwanath.org से बुक करें।
संध्या आरती
दुर्गाकुंड मंदिर
2024 समाचार के अनुसार निर्धारित समय 19:30; भीषण गर्मी में करीब आधा घंटा देर से। मंगलवार-शुक्रवार को भारी भीड़ — गर्भगृह के पास जगह के लिए पहले पहुंचें।
- →
शृंगार आरती
काशी विश्वनाथ मंदिर
अंतिम शयन आरती से पहले संध्या शृंगार आरती।
- →
शयन आरती
काशी विश्वनाथ मंदिर
दिन की अंतिम आरती; इसके बाद रात के लिए गर्भगृह दर्शन बंद।
समय भारतीय समय में हैं। ग्रहण, बाढ़ और पर्व के दिनों में मंदिर समय बदलते हैं — उसी दिन पुष्टि करें।
आगे देखें