त्योहार गाइड
देव दीपावली 2026
देव दीपावली, देवताओं की दिवाली, दिवाली के बाद की पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा पर मनाई जाती है।
23 दिन शेष
- तिथि
- मंगल, 24 नवंबर 2026
- मुख्य मुहूर्त
- दीपदान मुहूर्त · 5:07 – 7:46 अपराह्न
दिन की योजना
शुभ समय और बचने योग्य समय
· वाराणसी का समय (भारतीय समय)
शुभ मुहूर्त
- अभिजित मुहूर्त43मि
- ब्रह्म मुहूर्त53मि
- अमृत काल1घं 26मि
इन समयों से बचें
- दुर्मुहूर्त43मि
- यम गण्डम1घं 21मि
- राहु काल1घं 21मि
- दुर्मुहूर्त53मि
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- 6:21 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 5:07 अपराह्न
- चंद्रोदय
- 4:45 अपराह्न
पर्व का दिन
मंगल, 24 नवंबर का पंचांग
- तिथि
- पूर्णिमा, फिर प्रतिपदा
- नक्षत्र
- कृत्तिका
- योग
- परिघ
- करण
- विष्टि
- पक्ष
- शुक्ल
- मास
- कार्तिक
- तिथि
- पूर्णिमाआरंभ समाप्त फिर प्रतिपदासमाप्त
- नक्षत्र
- कृत्तिकाआरंभ समाप्त
चौघड़िया, दिन और रात
दिन
- रोगबचें
- उद्वेगबचें
- चलसामान्य
- लाभउत्तम
- अमृतउत्तम
- कालबचें
- शुभउत्तम
- रोगबचें
रात
- कालबचें
- लाभउत्तम
- उद्वेगबचें
- शुभउत्तम
- अमृतउत्तम
- चलसामान्य
- रोगबचें
- कालबचें
कहानी
देव दीपावली: महत्व और अनुष्ठान
देवता गंगा में स्नान करने और दीपों से उत्सव मनाने उतरते हैं। यह वाराणसी की अनूठी परंपरा है जो अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हो गई है।
अनुष्ठान
घाटों की सीढ़ियों पर दस लाख से अधिक दीये जलाएँ। पूर्णिमा के चंद्रमा के नीचे गंगा में पवित्र स्नान करें। भव्य गंगा आरती देखें। नदी में दीये प्रवाहित करें। नावों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम।
स्थानीय रंग
वाराणसी में देव दीपावली
देव दीपावली वाराणसी का सबसे भव्य उत्सव है। 10 लाख से अधिक दीये सभी 84 घाटों को रोशन करते हैं। प्रधानमंत्री अक्सर उपस्थित होते हैं। लेज़र शो, सांस्कृतिक कार्यक्रम और नौका विहार इसे अद्भुत बनाते हैं। गंगा पर नाव से दृश्य सर्वश्रेष्ठ होता है।
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