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जगन्नाथ रथ यात्रा

त्योहार गाइड 3058

जगन्नाथ रथ यात्रा

जगन्नाथ रथ यात्रा पुरी, ओडिशा में भगवान जगन्नाथ का भव्य रथ उत्सव है। जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन विशाल रथ हज़ारों भक्तों द्वारा सड़कों पर खींचे जाते हैं।

376854दिन शेषरथ यात्रा समय

कब पढ़ें

बुधवार, 14 जुलाई 3058 – गुरुवार, 22 जुलाई 3058

मुख्य समय

रथ यात्रा समय

उत्सव अवधि

9 दिन का उत्सव

अब आने वाला

376854 दिन बाद यह पर्व शुरू होगा।

पहले कहानी पढ़ें

समय देखने से पहले पर्व की धड़कन समझें

जगन्नाथ रथ यात्रा 9 दिनों में खुलता है, इसलिए यहां समय जितना जरूरी है, उतनी ही कहानी भी।

मनाया जाता है

बुधवार, 14 जुलाई 3058

मुख्य समय

रथ यात्रा समय

उत्सव अवधि

9 दिन का पर्व

दिन 1 / 9
बुध, 14 जुल॰

रथ यात्रा

मुख्य दिन: जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन विशाल रथ जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक खींचे जाते हैं। लाखों भक्त रस्सियाँ खींचते हैं। छेरा पहनरा — राजा सोने की झाड़ू से रथों की सफाई करते हैं।

सूर्योदय: 5:19 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 6:53 अपराह्न
दिन 2 / 9
गुरु, 15 जुल॰

दूसरा दिन (गुंडिचा विश्राम)

देवता गुंडिचा मंदिर (मौसी का घर) में विश्राम करते हैं। विशेष पूजा और भोग अर्पित किया जाता है। भक्त दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं।

सूर्योदय: 5:20 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 6:52 अपराह्न
दिन 3 / 9
शुक्र, 16 जुल॰

तीसरा दिन (गुंडिचा प्रवास)

देवता गुंडिचा मंदिर में प्रवास जारी रखते हैं। दैनिक अनुष्ठान, आरती और महाप्रसाद की तैयारी जारी। मंदिर भक्तों के लिए खुला रहता है।

सूर्योदय: 5:20 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 6:52 अपराह्न
दिन 4 / 9
शनि, 17 जुल॰

चौथा दिन (गुंडिचा प्रवास)

गुंडिचा मंदिर में उत्सव जारी। सांस्कृतिक कार्यक्रम और महाप्रसाद के साथ सामुदायिक भोज।

सूर्योदय: 5:21 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 6:52 अपराह्न
दिन 5 / 9
रवि, 18 जुल॰

हेरा पंचमी

देवी लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ की खोज में गुंडिचा मंदिर जाती हैं। पीछे छोड़े जाने के क्रोध में वे नंदीघोष रथ का एक हिस्सा तोड़ देती हैं। एक चंचल, प्रिय परंपरा।

सूर्योदय: 5:21 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 6:52 अपराह्न
दिन 6 / 9
सोम, 19 जुल॰

छठा दिन

वापसी यात्रा की तैयारी शुरू। गुंडिचा मंदिर में विशेष अनुष्ठान। भक्त प्रार्थना करते हैं और आशीर्वाद लेते हैं।

सूर्योदय: 5:21 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 6:51 अपराह्न
दिन 7 / 9
मंगल, 20 जुल॰

संध्या दर्शन

स्वर्ण आभूषणों (सुना बेशा) से सुसज्जित देवताओं का संध्या दर्शन। संपूर्ण रथ यात्रा उत्सव के सबसे पवित्र दर्शनों में से एक।

सूर्योदय: 5:22 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 6:51 अपराह्न
दिन 8 / 9
बुध, 21 जुल॰

आठवाँ दिन (वापसी पूर्व)

गुंडिचा मंदिर में अंतिम दिन। विदाई अनुष्ठान। वापसी शोभायात्रा के लिए रथों को तैयार और सजाया जाता है।

सूर्योदय: 5:22 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 6:50 अपराह्न
दिन 9 / 9
गुरु, 22 जुल॰

बहुदा यात्रा (वापसी)

भव्य वापसी यात्रा: तीनों रथ गुंडिचा मंदिर से जगन्नाथ मंदिर वापस खींचे जाते हैं। लाखों लोगों की भागीदारी के साथ समान भव्य शोभायात्रा। देवता भव्य उत्सव के साथ घर लौटते हैं।

सूर्योदय: 5:23 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 6:50 अपराह्न

त्योहार का महत्व

यह पर्व स्मृति में क्यों जीवित रहता है

जगन्नाथ रथ यात्रा पुरी, ओडिशा में भगवान जगन्नाथ का भव्य रथ उत्सव है। जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन विशाल रथ हज़ारों भक्तों द्वारा सड़कों पर खींचे जाते हैं।

अनुष्ठान पथ

अनुष्ठान

भक्तिपूर्वक रथ खींचें। जगन्नाथ मंदिर में महाप्रसाद पकाएँ। छेरा पहनरा (राजा द्वारा रथों की सफाई) करें। वापसी यात्रा (बहुदा यात्रा) 9वें दिन होती है।

कैसे समझें

उत्सव की लय

पहले समय पढ़ें, फिर मुख्य अनुष्ठान, फिर स्थानीय संदर्भ, ताकि पर्व की वास्तविक लय समझ आए।