
त्योहार गाइड 3059
जगन्नाथ रथ यात्रा
जगन्नाथ रथ यात्रा पुरी, ओडिशा में भगवान जगन्नाथ का भव्य रथ उत्सव है। जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन विशाल रथ हज़ारों भक्तों द्वारा सड़कों पर खींचे जाते हैं।
कब पढ़ें
सोमवार, 4 जुलाई 3059 – मंगलवार, 12 जुलाई 3059
मुख्य समय
रथ यात्रा समय
उत्सव अवधि
9 दिन का उत्सव
अब आने वाला
377209 दिन बाद यह पर्व शुरू होगा।
पहले कहानी पढ़ें
समय देखने से पहले पर्व की धड़कन समझें
जगन्नाथ रथ यात्रा 9 दिनों में खुलता है, इसलिए यहां समय जितना जरूरी है, उतनी ही कहानी भी।
मनाया जाता है
सोमवार, 4 जुलाई 3059
मुख्य समय
रथ यात्रा समय
उत्सव अवधि
9 दिन का पर्व
रथ यात्रा
मुख्य दिन: जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन विशाल रथ जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक खींचे जाते हैं। लाखों भक्त रस्सियाँ खींचते हैं। छेरा पहनरा — राजा सोने की झाड़ू से रथों की सफाई करते हैं।
दूसरा दिन (गुंडिचा विश्राम)
देवता गुंडिचा मंदिर (मौसी का घर) में विश्राम करते हैं। विशेष पूजा और भोग अर्पित किया जाता है। भक्त दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं।
तीसरा दिन (गुंडिचा प्रवास)
देवता गुंडिचा मंदिर में प्रवास जारी रखते हैं। दैनिक अनुष्ठान, आरती और महाप्रसाद की तैयारी जारी। मंदिर भक्तों के लिए खुला रहता है।
चौथा दिन (गुंडिचा प्रवास)
गुंडिचा मंदिर में उत्सव जारी। सांस्कृतिक कार्यक्रम और महाप्रसाद के साथ सामुदायिक भोज।
हेरा पंचमी
देवी लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ की खोज में गुंडिचा मंदिर जाती हैं। पीछे छोड़े जाने के क्रोध में वे नंदीघोष रथ का एक हिस्सा तोड़ देती हैं। एक चंचल, प्रिय परंपरा।
छठा दिन
वापसी यात्रा की तैयारी शुरू। गुंडिचा मंदिर में विशेष अनुष्ठान। भक्त प्रार्थना करते हैं और आशीर्वाद लेते हैं।
संध्या दर्शन
स्वर्ण आभूषणों (सुना बेशा) से सुसज्जित देवताओं का संध्या दर्शन। संपूर्ण रथ यात्रा उत्सव के सबसे पवित्र दर्शनों में से एक।
आठवाँ दिन (वापसी पूर्व)
गुंडिचा मंदिर में अंतिम दिन। विदाई अनुष्ठान। वापसी शोभायात्रा के लिए रथों को तैयार और सजाया जाता है।
बहुदा यात्रा (वापसी)
भव्य वापसी यात्रा: तीनों रथ गुंडिचा मंदिर से जगन्नाथ मंदिर वापस खींचे जाते हैं। लाखों लोगों की भागीदारी के साथ समान भव्य शोभायात्रा। देवता भव्य उत्सव के साथ घर लौटते हैं।
त्योहार का महत्व
यह पर्व स्मृति में क्यों जीवित रहता है
जगन्नाथ रथ यात्रा पुरी, ओडिशा में भगवान जगन्नाथ का भव्य रथ उत्सव है। जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन विशाल रथ हज़ारों भक्तों द्वारा सड़कों पर खींचे जाते हैं।
अनुष्ठान पथ
अनुष्ठान
भक्तिपूर्वक रथ खींचें। जगन्नाथ मंदिर में महाप्रसाद पकाएँ। छेरा पहनरा (राजा द्वारा रथों की सफाई) करें। वापसी यात्रा (बहुदा यात्रा) 9वें दिन होती है।
कैसे समझें
उत्सव की लय
पहले समय पढ़ें, फिर मुख्य अनुष्ठान, फिर स्थानीय संदर्भ, ताकि पर्व की वास्तविक लय समझ आए।