Skip to content
HelloBanaras

शहर की कहानीवीडियोविरासत

वाराणसी कितनी पुरानी है? राजघाट की खुदाई और काशी की प्राचीन जड़ों की कहानी

काशी में किसी से भी पूछिए कि उनका शहर कितना पुराना है, तो जवाब अक्सर मुस्कुराहट के साथ एक ही शब्द में मिलता है: अनादि।

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

परंपरा वाराणसी को सृष्टि के आरंभ और स्वयं भगवान शिव से जोड़ती है। वहीं इतिहासकार और पुरातत्वविद इस प्रश्न को अलग नज़र से देखते हैं, और यह संवाद शहर की विरासत का एक रोचक हिस्सा है।

कहानी अक्सर राजघाट से शुरू होती है, जो वरुणा और गंगा के संगम के पास शहर के उत्तरी छोर पर स्थित है। यहाँ बीसवीं सदी के मध्य में हुई खुदाइयों में मिट्टी की परतों के नीचे एक प्राचीन बस्ती के प्रमाण मिले। मिट्टी के बर्तन, औज़ार और नगर-जीवन के अवशेषों ने विद्वानों को समझने में मदद की कि नदी किनारे की एक छोटी बस्ती कैसे धीरे-धीरे एक सुव्यवस्थित नगर बन गई। इन प्रमाणों ने वाराणसी को भारतीय उपमहाद्वीप के उन नगरों में रखा, जहाँ सदियों से निरंतर जीवन बसा रहा है।

यह याद रखना ज़रूरी है कि आस्था की स्मृति और पुरातात्विक साक्ष्य दो अलग प्रश्नों के उत्तर देते हैं। आस्था एक कालातीत काशी की बात करती है, जबकि पुरातत्व वही बताता है जो धरती ने परत-दर-परत सहेजा है। दोनों एक-दूसरे को कम नहीं करते, बल्कि मिलकर बताते हैं कि बनारस की जड़ें इतनी गहरी क्यों महसूस होती हैं।

पास का सारनाथ इस कथा में एक और अध्याय जोड़ता है, जो याद दिलाता है कि यह क्षेत्र दो हज़ार वर्षों से भी अधिक समय से शिक्षा, दर्शन और आध्यात्मिक खोज का केंद्र रहा है। यदि आप इस गहराई को महसूस करना चाहते हैं, तो सुबह-सुबह घाटों पर टहलिए, राजघाट क्षेत्र और सारनाथ संग्रहालय देखिए, और स्थानीय कथावाचकों को सुनिए। बनारस की हर गली एक बहुत लंबी कहानी का हिस्सा है।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: