धार्मिक स्थलBhadaini
Shri Sankat Mochan Hanuman Temple
पहले से जानें
आरती आम तौर पर सुबह मंदिर खुलने के कुछ देर बाद, शाम को गोधूलि के आसपास और रात में मंदिर बंद होने से पहले होती है। मंगलवार, शनिवार और हनुमान जयंती पर सबसे अधिक भीड़ रहती है। सटीक समय मौसम के अनुसार बदलता है, इसलिए स्थानीय रूप से पुष्टि करें।
Daily about 4:30 AM – 10:30 PM
जाने से पहले
कहानी
मान्यता है कि जहाँ गोस्वामी तुलसीदास को हनुमान जी के दर्शन हुए, वहीं आज संकट मोचन मंदिर खड़ा है, जहाँ हर मंगलवार और शनिवार पूरा बनारस हनुमान चालीसा गाने उमड़ पड़ता है। यही आँगन देश के सबसे सम्मानित शास्त्रीय संगीत समारोहों में से एक का मंच भी है।
मंदिर भदैनी में दुर्गाकुंड–लंका मार्ग पर है। यहाँ से अस्सी घाट और बीएचयू का गेट, दोनों थोड़ी ही दूर हैं। बनारसियों के लिए यह एक बार देखकर भूल जाने वाली जगह नहीं है। यह हफ़्ते की दिनचर्या का हिस्सा है: परीक्षा से पहले विद्यार्थी, और शादी या यात्रा से पहले परिवार यहाँ माथा टेकने आते हैं।
परंपरा कहती है कि संत-कवि तुलसीदास को यहीं हनुमान जी के दर्शन हुए और उन्होंने इस स्थान की स्थापना की। वे पास ही तुलसी घाट पर रहकर लिखते थे। वे रामचरितमानस के रचयिता हैं, और परंपरा हनुमान चालीसा की रचना का श्रेय भी उन्हीं को देती है।
बीएचयू के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय को मंदिर के जीर्णोद्धार और आज के स्वरूप का श्रेय दिया जाता है।
हनुमान जयंती के आसपास वार्षिक संगीत-नृत्य समारोह की नींव पड़ी। आगे चलकर यह देश का प्रतिष्ठित मंच बना, जहाँ दिग्गज कलाकार बिना शुल्क, भेंट के रूप में प्रस्तुति देते हैं।
मंदिर के महंत और इंजीनियर प्रो. वीर भद्र मिश्र ने संकट मोचन फ़ाउंडेशन शुरू किया। इसने स्वच्छ गंगा के लिए अभियान चलाया और मंदिर को पर्यावरण आंदोलन से जोड़ दिया।
मार्च में मंदिर पर बम हमला हुआ। अगले ही दिन श्रद्धालु फिर पूजा करने लौट आए, और शहर आज भी उस जज़्बे को याद करता है। तब से सुरक्षा कड़ी है।
पेड़ों की छाँव वाले परिसर में घुसते ही बंदर दिखते हैं, जिन्हें भक्त हनुमान जी का ही परिवार मानते हैं। हवा में अगरबत्ती और गेंदे की ख़ुशबू रहती है। गर्भगृह में सिंदूर से सजी हनुमान जी की प्रतिमा सामने श्रीराम के मंदिर की ओर देखती है, मानो भक्त सदा अपने प्रभु को निहार रहा हो।
सभी के लिए निःशुल्क
रोज़ लगभग सुबह 4:30 से रात 10:30 बजे तक। त्योहारों पर समय बदल सकता है।
कंधे और घुटने ढकने वाले शालीन कपड़े। जूते बाहर उतारें।
दुर्गाकुंड–लंका मार्ग, भदैनी, बीएचयू और अस्सी के पास
काम की बातें
स्थापना से जुड़ी एक और कथा है। तुलसीदास के आग्रह पर हनुमान जी ने स्वयं अपनी मिट्टी की प्रतिमा गढ़ी थी। इसी प्रतिमा को स्वयंभू माना जाता है, और बाद में यही मंदिर में विराजमान की गई।
हनुमान जयंती पर शोभा यात्रा ज़रूर देखें। यह पास के दुर्गाकुंड मंदिर से निकलती है, और हज़ारों भक्त इसके साथ संकट मोचन की ओर चलते हैं।
मंदिर हनुमान जयंती तीन दिन की राम कथा के साथ मनाता है। इसमें हनुमान जी की राम-भक्ति के प्रसंग सुनाए जाते हैं। परिसर फूलों और रोशनी से सजता है, और विशेष पूजा-आरती होती है।
बसंत पंचमी पर मंदिर में संगीतमय नवाह पाठ होता है। साथ ही स्थानीय विद्यार्थी गायन, निबंध, चित्रकला और रामचरितमानस पर आधारित प्रस्तुतियों की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं।
राम विवाह पंचमी पर नौ दिन का नवाह पाठ होता है और हर शाम राम कथा होती है। राम-सीता की प्रतिमाओं का दूल्हा-दुल्हन जैसा श्रृंगार होता है। पाठ के बाद नामी गायकों का भजन सम्मेलन होता है।
आज मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र हैं। वे अपने पूर्ववर्ती, स्वर्गीय प्रो. वीर भद्र मिश्र की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
कैसे पहुँचें
श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर वाराणसी के Bhadaini में स्थित धार्मिक स्थल है (Tulsi Ghat)।
सवाल-जवाब
आगंतुकों से
श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर को रेटिंग दें
श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर की अभी कोई समीक्षा नहीं है। पहली समीक्षा आप लिखें।
आसपास घूमें
बालाजी
Balaji
दुकान, भेलूपुर, बिल्कुल बगल में
मुफ्फ़सिल उप और बिहार
Mfa Up & Bihar
स्कूल, भेलूपुर, बिल्कुल बगल में
बीएचयू एफएससी
BHU FSc
कॉलेज, भेलूपुर, 40 मी दूर
फैबएक्सप्रेस बनारसी कोठी - होटल्स इन लंका
FabExpress Banarasi Kothi - Hotels in Lanka
होटल, भेलूपुर, 50 मी दूर
करौली डायग्नोस्टिक, संकट मोचन (पेट सीटी स्कैन)
Karauli Diagnostic, Sankat Mochan (Pet ct scan)
क्लिनिक, भेलूपुर, 80 मी दूर
एआरपी इलेक्ट्रॉनिक्स सुरक्षा समाधान
ARP Electronics Security Solutions
दुकान, भेलूपुर, 90 मी दूर